Maldives Calls for SAARC Revival; India Reiterates Stand on Cross-Border Terrorism
📍 New Delhi / Malé | GenZ Times Special Report
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) एक बार फिर चर्चा में है। मालदीव के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज्जू ने संगठन को दोबारा सक्रिय करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि दक्षिण एशिया के देशों के बीच व्यापार, आर्थिक विकास, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय सहयोग के लिए SAARC को फिर से प्रभावी बनाया जाना चाहिए.
हालांकि, भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सीमा-पार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism) और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान हुए बिना SAARC की प्रभावी प्रगति संभव नहीं है.
🌏 SAARC क्या है?
SAARC (South Asian Association for Regional Cooperation) की स्थापना 1985 में हुई थी।
इस संगठन के सदस्य देश हैं:
- 🇮🇳 भारत
- 🇵🇰 पाकिस्तान
- 🇧🇩 बांग्लादेश
- 🇳🇵 नेपाल
- 🇱🇰 श्रीलंका
- 🇧🇹 भूटान
- 🇲🇻 मालदीव
- 🇦🇫 अफगानिस्तान
इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
🇲🇻 मालदीव का क्या कहना है?
मालदीव का मानना है कि:
- SAARC को दोबारा सक्रिय किया जाए।
- सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़े।
- व्यापार और निवेश को नई गति मिले।
- जलवायु परिवर्तन जैसे साझा मुद्दों पर मिलकर काम किया जाए।
- दक्षिण एशिया की एकता को मजबूत किया जाए।
🇮🇳 भारत का पक्ष
भारत का कहना है कि:
- सीमा-पार आतंकवाद क्षेत्रीय सहयोग में सबसे बड़ी बाधा है।
- आतंकवाद और सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान जरूरी है।
- सुरक्षित और विश्वासपूर्ण माहौल बनने के बाद ही SAARC को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में BIMSTEC जैसे वैकल्पिक क्षेत्रीय मंचों पर भी अधिक ध्यान दिया है।
🤝 इसका क्या असर हो सकता है?
यदि SAARC दोबारा सक्रिय होता है, तो:
- 📈 क्षेत्रीय व्यापार बढ़ सकता है।
- ✈️ पर्यटन और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
- 🌍 जलवायु और आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ेगा।
- 👨🎓 शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी साझेदारी मजबूत होगी।
हालांकि, राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के बिना संगठन की सक्रियता सीमित रह सकती है.